top of page
Search

हिंदी कविता

  • Writer: Akash Jagtap
    Akash Jagtap
  • Sep 27, 2018
  • 1 min read

दिल कि किताब से चंद अल्फाज ढुंढता मै रह गया,

सुनाना था उसे कुछ, खुदसे ही बोलता रह गया


काश के लिखे हुए वो खत उसे भेज भी दिये होते

काश के धडकनो के कबुतर उसकी ओर छोड भी दिये होते


जाना था ही उसे जिंदगीसे पर सुनके तो गयी होती,

सूना था ही आंगण दिलका, पर आज ये बेचैनी तो ना होती


काश उस आखरी मुलाकात को तो हसीन बना पाता मै,

चंदनसी खुशबू उसकी दिल कि गहराई मे उतार पाता मै,


मेहेकती रहती फिर ये जिंदगी बस वही खुशबू बनके,

फिर वो रह जाती मुझमे हमेशा के लिये मेरी साँसे बनके


-आकाश

 
 
 

Recent Posts

See All
प्राणिसंग्रहालयातला निरागस वाघ

प्राणिसंग्रहालयातला निरागस वाघ वैतागून आला वाघ, प्राणिसंग्रहालयातून बाहेर, भयभीत झाली जनता, पळत सुटली चौफेर पहिल्यांदा वाघाने, चौकट होती...

 
 
 
कविता

एकाच वाटेवर चालत आलो, आजपर्यंत तू आणि मी, आज बदललीस वाट तुझी, पण नको करू प्रयत्न, त्या पाऊलखुणा मिटवण्याच्या, हरशील! चन्द्र वेगळा जो...

 
 
 

Comments


Post: Blog2_Post

Contact

8087366887

Follow

  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn

©2018 by Sanmitra. Proudly created with Wix.com

bottom of page